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जीवाधारी - खज़ानो के रक्षक

जीवाधारी - खज़ानो के रक्षक
दोस्तों, ये घटना तब की है जब मेरी नानी जी की उम्र १५ - १६ की रही होगी। तब वह उत्तर प्रदेश के सुलतान पुर जिले के एक गाँव में रहती थीं वहीँ उनका मायका है। उस समय में अक्सर बंजारे और नट अपनी टोलियाँ बनाकर घूमा करते थे। ये नट और बंजारे एक स्थान से दुसरे स्थान पर घूमते थे और जहाँ ज्यादा आबादी देखते थे वहां पर अपना मेला लगा कर करतब दिखाया करते थे और पैसे कमाते थे।

ये बंजारे हमेशा अच्छे नहीं होते थे। अक्सर बंजारों और नटों की टोली के रूप में डाकुओ की भी टोली घूमा करती थी। जो दिन में तो मेला लगाते थे मगर रात में लूटपाट किया करते थे। इसलिए अक्सर गाँव के जानकार लोग अपने गाँव के आसपास इस तरह का नटों का मेला नहीं लगने देते थे।

एक बार एक ऐसा ही मेला नानी के गाँव से थोड़ी दूर पर लगा हुआ था। वहां गाँव के बच्चे अक्सर जाने की जिद किया करते थे मगर कोई उन्हें वहां जाने नहीं देता था। इतना ही नहीं गाँव वालो ने बच्चो का खेतों में जाना और दोपहर को बाहर खेलने से मना कर दिया था। बच्चो को ये बात बहुत ख़राब लगती थी मगर बड़ो के आगे बच्चो की कहाँ चलती। इसलिए बच्चे न चाहते हुए भी सिर्फ तभी तक घर…

क्या वो प्यार था

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क्या वो प्यार था
जब कॉलेज में पहले दिन तुम्हें पहली दफा देखा था,
 तो ऐसा लगा था कि जिंदगी थम सी गई हो.

मैं मेरे दोस्तों के साथ क्लास की आखरी बेंच पर, कोने की आखिरी सीट पर बैठा हुआ था. ताकि, मुझे पूरी क्लास का view मिल सके और उस view के center में तुम रहो, जिससे मेरा फोकस सिर्फ तुम पर बना रहे. Mam जोर से चिल्ला कर कुछ पढ़ाने की कोशिश कर रही थी, मगर तुम्हारी धड़कनों से उनकी आवाज मेरे लिए कहीं गुम सी हो गई थी.
क्या वो प्यार था??


मुझे नहीं आता प्यार का इजहार करना, काश तुम आंखों की भाषा समझ लेती. मैं जो कहना चाहता था, वो कह नहीं पाया. दिल में जो बात थी वह जुबान पर आती तो थी, लेकिन लफ्जों में तब्दील होने से पहले ही पता नही कहां खो जाती थी.
 क्या वो प्यार था??

आंखों से आंखें मिल गई,
बातों से बातें मिल गई.
बातों के लिए मुलाकातें बढ़ गई,
और वो मुलाकातें धीरे-धीरे दोस्ती में तब्दील हो गई...

तब तुमने मुझसे एक बात कही थी "शुभम !!! लड़की का हाथ हमेशा धीरे से पकड़ते हैं" और मैं पगला मन ही मन में मुस्कुरा कर कह गया कि - "मैं तुम्हारे हाथ को जिंदगी भर पकड़कर रखना चाहता हूं" 
क्या वो प्यार था…

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एक लड़के की विचित्र लव स्टोरी

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एक लड़के की विचित्र लव स्टोरी



एक अमीर लड़का था. उसे एक गरीब किसान की लड़की से प्यार हो गया. लड़की सुंदर होने के साथ-साथ काफी समझदार थी. एक दिन जब लड़के ने उस लड़की को बताया कि "वह उससे प्यार करता है, और उससे शादी करना चाहता है"  तो लड़की ने कुछ सोचने के बाद उस लड़के को शादी करने से इनकार कर दिया. क्योंकि - वह गरीब परिवार से रिश्ता रखती थी. 

लेकिन कुछ समय बाद जब ये बात उस लड़के को पता चली, तो उस ने लड़की के माता-पिता से बात की और उस लड़की को समझाया. काफी समझाने के बाद वह लड़की मान गयी और दोनों की शादी हो गयी.शादी के बाद, लड़का उसे बहुत प्यार करता था. दोनों का दांपत्य जीवन काफी अच्छा चल रहा था.

लेकिन कुछ महीनों बाद लड़की को चर्मरोग (skin diseases) हो गया. जिसके कारण उसकी खूबसूरती ढलने लगी. अब लड़की को यह डर भी सताने लगा, "कि उसकी खूबसूरती ढलने के कारण, कहीं उसका पति उसे छोड़ न दे." लड़की उस चर्म रोग को ठीक करने का हर संभव प्रयास कर रही थी.


 समय बीत रहा था और लड़की की खूबसूरती धीरे-धीरे ढल रही थी. एक दिन वह लड़का एक काम से दूसरे शहर गया. लड़का जब वहां से वापस आ रहा था…

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भादों का महीना. काली अँधियारी रात. कभी-कभी रह-रहकर हवा का तेज झोंका आता था और आकाश में रह-रहकर बिजली भी कौंध जाती थी. रमेसर काका अपने घर से दूर घोठे पर मड़ई में लेटे हुए थे. रमेसर काका का घोठा गाँव से थोड़ा दूर एक गढ़ही (तालाब) के किनारे था. गढ़ही बहुत बड़ी नहीं थी पर बरसात में लबालब भर जाती थी और इसमें इतने घाँस-फूँस उग आते थे कि डरावनी लगने लगती थी.

इसी गढ़ही के किनारे आम के लगभग 5-7 मोटे-मोटे पेड़ थे, दिन में जिनके नीचे चरवाहे गोटी या चिक्का, कबड्डी खेला करते थे और मजदूर या गाँव का कोई व्यक्ति जो खेत घूमने या खाद आदि डालने गया होता था आराम फरमाता था.

धीरे-धीरे रात ढल रही थी पर हवा का तेज झोंका अब आँधी का रूप ले चला था. आम के पेड़ों के डालियों की टकराहट की डरावनी आवाज उस भयंकर रात में रमेसर काका की मड़ई में बँधी भैंस को भी डरा रही थी और भैंस डरी-सहमी हुई रमेसर काका की बँसखटिया से चिपक कर खड़ीं हो गई थी. रमेसर काका अचानक सोए-सोए ही हट-हट की रट लगाने लगे थे पर भैंस अपनी जगह से बिना टस-मस हुए सिहरी हुई हटने का नाम नहीं ले रही थी.

रमेसर काका उठकर बैठ गए और बैठे-बैठे ही भैंस के पेट पर हाथ फ…

सर्दी जुकाम से बचने के आसान घरेलू उपचार Easy home remedies to avoid winter colds

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जब हमारा शरीर मौसम के अनुसार एडजस्ट नहीं करता है तो हम मौसमी रोगों के शिकार हो जाते है।मौसम के बदलाव के दौरान व्यक्ति का शरीर वातावरण में हो रहे बदवाल को नहीं झेल पाता है और सर्द-गर्म के असर से सर्दी-जुकाम से ग्रसित हो जाता है|सर्दी की शुरुआत नाक से होती है पर धीरे-धीरे इसका असर पूरे शरीर पर होने लगता है। जुकाम की कोई चिकित्सा नहीं है। इस स्वतः कम होने वाली बीमारी में घरेलू चिकित्सा ज्यादा उपयोगी होती है। यहाँ पर हम इससे बचने के लिए कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं...

*जब कभी आपके गले में खराश हो और आपकी नाक सर्दियों में बंद हो जाए, तो एक गिलास गर्म पानी में चुटकी भर नमक डालकर गरारे करें। इसे आपका गला साफ होगा और यह वायरस को दुबारा आपके शरीर में प्रवेश करने से रोकता है।

*शहद के साथ अदरक का सेवन सुबह शाम करने से भी सर्दी जुकाम में जल्दी आराम मिलता है।

*किसी सटीम वेपराईज़र से ली गई भाप बंद नाक और बलगम से राहत दिलाएगी। अगर, आपके पास सटीम इंहेलर नहीं है, तो आप केतली में गर्म पानी डालकर भी भाप ले सकते हैं।

*हल्दी को यदि गर्म दूध के साथ किया जाए, तो यह कफ हटाती है और जुकाम में भी बहुत राहत पहुंचाती ह…